Yantra

Batuk Bhairav Yantra

₹599.00 (Excl. GST)
In Stock
Base: ₹599.00  +  ₹0.00 GST (0%)  |  Total: ₹599.00

बटुक भैरव भगवान शिव के बाल स्वरूप से संबंधित अत्यंत लोकप्रिय भैरव रूप हैं। ‘बटुक’ शब्द का अर्थ बालक से है। जहाँ काल भैरव का स्वरूप अत्यंत उग्र और कालतत्त्व से संबंधित माना जाता है, वहीं बटुक भैरव का स्वरूप अपेक्षाकृत सौम्य, शीघ्र प्रसन्न होने वाला तथा भक्तों की रक्षा करने वाला माना जाता है। इसी कारण गृहस्थों में बटुक भैरव की उपासना विशेष रूप से प्रचलित है।

बटुक भैरव यंत्र को भैरव तत्त्व का सूक्ष्म प्रतीक माना जाता है। यंत्र की विभिन्न ज्यामितीय रचनाएँ ब्रह्मांडीय शक्ति, चेतना और देवतत्त्व के प्रतीकात्मक रूप हैं। यंत्र के मध्य भाग में स्थापित बीजाक्षर अथवा देवता-संबंधी मंत्रात्मक चिह्न साधना का मुख्य केंद्र माना जाता है।

बटुक भैरव की उपासना भय, अनिष्ट की आशंका, नकारात्मक प्रभाव, कार्यों में आने वाले अवरोध तथा मानसिक असुरक्षा से रक्षा के लिए की जाती है। लोकपरंपरा में उन्हें शीघ्र फल देने वाले देवता के रूप में भी स्मरण किया जाता है। विशेष रूप से रविवार, मंगलवार तथा भैरवाष्टमी जैसे अवसरों पर उनकी उपासना का विशेष महत्व माना जाता है, यद्यपि पूजा के लिए किसी एक दिन की अनिवार्यता नहीं है।

बटुक भैरव यंत्र की स्थापना स्वच्छ पूजा-स्थान में की जाती है। यंत्र को शुद्ध जल अथवा गंगाजल से स्पर्शपूर्वक शुद्ध करके वस्त्र अथवा चौकी पर स्थापित किया जा सकता है। दीप, धूप, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करके भगवान का ध्यान किया जाता है।

सामान्य उपासना के लिए “ॐ बटुकभैरवाय नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है। तांत्रिक साधना में प्रयुक्त विशिष्ट मंत्र, न्यास, आवरण-पूजा तथा बीजमंत्र परंपरा और गुरु-दीक्षा के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

बटुक भैरव यंत्र का मूल भाव रक्षण, साहस, मानसिक स्थिरता और विघ्न-निवारण है। गृहस्थ साधक को सरल एवं सात्त्विक पूजा-पद्धति अपनानी चाहिए। उग्र तांत्रिक प्रयोग बिना योग्य गुरु के निर्देशन के नहीं करने चाहिए।

इस प्रकार बटुक भैरव यंत्र को भक्त और भैरव तत्त्व के बीच ध्यान एवं उपासना का माध्यम माना जा सकता है। श्रद्धा और नियमितता इसके पूजन में प्रमुख मानी गई हैं।

Apply Coupon Code

OR SELECT FROM AVAILABLE OFFERS
Loading active offers...
Chat on WhatsApp
Call +91 98705 75656